Saturday, September 22, 2012

उम्र

बात उम्र की ना करो

जवानी अभी सयानी है

चर्चे सरे आम किया ना करो

हाल ये मज्मुं वयाँ किया ना करो

अभी तो ये लड्क्प्पन की जवानी है

जवानी अभी सयानी है

नागवारा है जिक्र उम्र का

यौवन पड़ाव अभी बाकी है

बात उम्र की ना करो

जवानी अभी सयानी है

Friday, September 21, 2012

दिवा स्वप्न

दिवा स्वप्न था कोई

सुन्दर कविता बने कोई

हर लफ्जों में जिसकी

बसी हो सरस्वती वंदना कही

जो मौन रहे तब भी

छू ले ह्रदय तार कही

प्रेरणा हो वो जीने की जैसे कोई

सप्तरंगो में रंगी

मधुर बोलो से सजी

सुन्दर कविता बने कभी

दिवा स्वप्न जो था कोई

सच हो वो खाब्ब कभी 

Wednesday, September 19, 2012

गुफ्तगुं

सुध बुध भुला बातों में मशगुल जवानी

उलझी लट्टे बिखरे बाल

उन्मुन्दी आँखे वयां कर रही कहानी

थक के चूर ह जिंदगानी , पर

विश्राम के लिए बातों से फुर्सत कहा

इशारों इशारों में  समझा रही जवानी

लुफ्त जो ना लिया इस पल

गुफ्तगुं बन जायेगी परेशानी

भुला सुध बुध बातों में मशगुल जवानी

 

जीवन पथ

डग डग चलता गया

कोस कोस बड़ता गया

होले होले धीमे धीमे

जीवन पथ अग्रसर होता गया

मनन कर स्मरण कर

कदम वक़्त के साथ मिलाता चला गया

उद्वेग गिलानी इर्ष्या भुला

एक प्यार भरी दुनिया संजोने

कांटो की राहों पे चलता गया

होले होले धीमे धीमे

जीवन पथ अग्रसर होता गया

लौ

अकेले ये तय ना कर पाया

किस राह चलते जाना है

देख दिए को ये ख्याल आया

प्रकाश पुंज की एक छोटी सी लौ  

पथ प्रदर्शक बन

जिन राहों को रोशन करे

उन राहों पे चलते जाना है