Monday, April 1, 2019

अकेला

तन्हा हूँ पर अकेला नहीं हूँ

तेरी यादों में आज भी जिन्दा हूँ

राहे माना हमारी जुदा थी

दो कदम पर जो साथ चले

कस्ती वो मझधारों की मारी थी

लकीरें क़िस्मत भी दगा कर गयी

थमा तेरे आँचल की डोर

रूह मेरी मुझसे चुरा ले गयी

लहू अस्कों का हिना बन

जैसे दुल्हन हाथों सज आयी

और डोली संग संग अर्थी रिश्तों की सज आयी

फ़िर भी यादें तेरी इस दिल में दफ़न ना कर पायी

अनजाने में ही सही ओर जिन्दा रहने को

तन्हाई के लिए एक मौसिक़ी नजरानें में दे आयी

एक मौसिक़ी नजरानें में दे आयी

कुँजी

जज्बातों की ताबीर

अनछुए पहलुओं से टकरा गयी

खनखनाहट इसकी हौले से

कानों में कुछ गुनगुना गयी

एक नए तिल्सिम का पिटारा खोल

रंगीन जादुई दुनिया बसा गयी

सपनों के इस संसार ने

रातों की नींद भुला दी

और संग अपने जीने

कुँजी जज्बातों की थमा दी

भूली बिसरी यादों को आयाम नया दे

जज्बातों की ताबीर

जिंदगी जीने का सलीक़ा सीखा गयी

जिंदगी जीने का सलीक़ा सीखा गयी

  

आपके नाम

खूबसूरत सी नज़्म लिखूँ

या इस दिल की ग़ज़ल लिखूँ

आपकी कातिलाना निग़ाहों को

झीलों का हसीन शहर लिखूँ

धड़कनों पे दिल के पैगाम लिखूँ

एक नयी साज़ एक नयी धुन पे

आफ़ताब की एक नयी सरगम लिखूँ

दामन में आपके अपना नाम लिखूँ

गीत लिखूँ या सफ़र लिखूँ

माथे की बिंदिया को मेहताब लिखूँ

रूहों के मिलन को ताज़ का पैयाम लिखूँ

कुछ भी लिखूँ चाहे गीत हो या ग़ज़ल

दिल कह रहा हैं

दिल यह बस आपके नाम लिखूँ

दिल यह बस आपके नाम लिखूँ  

Monday, March 11, 2019

एक तरफ़ा

दुनिया मुरीद हैं मेरे अफसानों की

चाँद सितारों से इश्क़ फ़रमानें की

महबूब थी एक चाँद सी कभी

एक तरफ़ा था मगर अंदाज़ ए सफर

रुमानियत भरी थी पर इस दिल अज़ीज़ में

शरारत कहूँ या आँख मिचौली

कभी बन फिरती वो संग जैसे हो कोई हमजोली

कभी बनाता दिल चुपके से उसकी कोई रंगोली

कभी रंगता उसके रंग जैसे छाई हो होली

फ़िदा थी वो मगर किसी ओर की मौसिकी पे

नजरें इनायत थी उनकी किन्ही ओर की दहलीज़ पे

रास ना आयी उनको दिल्लगी मेरी ए

तरस गयी रूह, भटक गयी कहानी ए

ग़ज़ल रह गयी यह आधी अधूरी किसी मोड़ पर

दुआ फिर भी इनायत, उनकी सलामती के लिए हर मोड़ पर  

Wednesday, March 6, 2019

दर्द की लेखनी

लेखनी दर्द की ताबीर बन गयी

अर्थहीन भावनावों की जागीर बन गयी

किस करवट पलटू पन्नों को

किताब अश्कों से भारी हो गयी

जुदा रूह से जो साँसे हुई

हर पन्ने बदरंगी जुबानी हो गयी

रक्त के कतरे से लिखी सजी कहानी

गुमनामी की गलियों में खो गयी

हौले हौले चलती लेखनी कुछ ऐसा लिख गयी

मयखानों से दिलों का नाता जोड़ गयी

दर्द जहाँ अल्फाजों में  सज

महफ़िल की शान बन गयी

लेखनी दर्द की ताबीर बन गयी

अर्थहीन भावनावों की जागीर बन गयी