हुनर ना आया उन्हें नज़रअंदाज़ करने का
स्वांग रचा मशरूफ होने का
पर अंदाज़ गुस्ताख़ नयनों का
दिल ए नादान संभाल ना पाया
फिसल गया
देख कायनात में जन्नत की माया
रूह लिख रही थी जैसे
हर तरफ आयतों का साया
कलमा था वो बड़ा ही पाक ए नबीज़
गुनगुना रही थी जो वो दिल ए अज़ीज़
मशगूल थी वो अपनी ही धुन में
भूल बैठी थी
दिल भी वही कही है करीब में
वही कही है करीब में
स्वांग रचा मशरूफ होने का
पर अंदाज़ गुस्ताख़ नयनों का
दिल ए नादान संभाल ना पाया
फिसल गया
देख कायनात में जन्नत की माया
रूह लिख रही थी जैसे
हर तरफ आयतों का साया
कलमा था वो बड़ा ही पाक ए नबीज़
गुनगुना रही थी जो वो दिल ए अज़ीज़
मशगूल थी वो अपनी ही धुन में
भूल बैठी थी
दिल भी वही कही है करीब में
वही कही है करीब में