Saturday, February 12, 2022

तस्दीक

जिंदगी ने भी कल तोहमत लगाई थी l
संभाली नहीं आरज़ुएँ मुद्दतों से मैंने कई ll

गिनी थी कल इसने मेरे साँसों की माला l
बड़ी बदरंग सी थी इनमे कुछ की काया ll

कुछ रोज पहले रंग भरे दिल की गहराइयों ने l
रंगी थी तस्वीर जिस इश्कों नूर ए चाँद की ll

धड़कनों में डूबी अपनी जिस कूची परछाई से l
पर कल रात वो क्यों नज़र आयी अर्ध चाँद सी ll

थम गयी रफ़्तार शायद मेरे अरमानों की l
राख हो गयी धुंआ मेरे जलते अंगारों की ll

तस्दीक यही हैं मेरी खुद से रुस्वाई का l
हमराज़ कोई बना नहीं मेरी परछाईं का ll

हमराज़ कोई बना नहीं मेरी परछाईं का l
हमराज़ कोई बना नहीं मेरी परछाईं का ll

Sunday, February 6, 2022

अकेली रात

कल की वो रात बड़ी अकेली थी l
अक्स भी वो गुमशुदा लापता था ll

दीदार में जिसके ठहरी हुई रातें भी l
खामोशी से ढ़ल सी जाया करती थी ll

अक्सर ख्वाब बन जो आया करता था l
मंजर कल की रात का वो अधूरा सा था ll

आवाज दे पुकारूँ उसे इस आलम में कैसे l
दर्द में डूबे अल्फाजों से कशिश वो दूर थी ll

काश यह रात मुझे भी अपने में समा जाती l
तन्हा करवटों में थोड़ी सी नींद पिरो जाती ll

मगर बारिश की वो करुण भीगी भीगी रुन्दन l
मेघों की वो भयभीत कांपती सी थरथराहट ll

डरा रही थी अधखुली पलकों को ऐसे l
नाता ना जोड़ों इन परायी नींदों से ऐसे ll 

चाँद वो जो अक्सर संग मेरे जगा करता था l
कल रात वो भी बिन सुलायें खो गया था ll

इस बैरंग आसमाँ में रंग जिसके भरा करते थे l
वो गुमनाम अक्स कल रात से गुमशुदा सा था ll

Wednesday, February 2, 2022

दिलकशी

अहसास उन मीठी मीठी यादों लम्हों का l 
श्रृंगार में रचे ढले हसीन सुरीले तरानों का ll

काफ़िला ले आया संग अपने एक बार फिर ये l
रंगने कारवाँ यादों की मौशिकी महफ़िलों का ये ll 

नज़र उतारू हर एक उन याद पायदानों की l
मरुधर संगम होता इनका जिस चिलमन पर ll

परछाइयाँ रूह सायों में लिपटी बेजुबान सी l
हर कदम जुदा यादों से होती जिस एक मोड़ पर ll 

अविस्मरणीय स्मृति ग्रंथ पल पल छलके l
इनके कण कण से अमृत सागर बूँदों सी ll

संकोच कुछ ऐसा यादों की इन तालीम में l
पलकें झुका कहती सिर्फ आँखों पुतलियों से ll 

मीठे दर्द सा फरमान इन अकेली तन्हा यादों में l 
फेहरिस्त लिखता जैसे अर्ध चाँद ढलती रातों में ll

जब जब आयी यादें बरसती सी मरुधर अंजुमन में l
साँसों को साँसों से जोड़ आयी इसके पहलू दामन से ll

डुबों इस मरुधर को मीठी यादों की सौगात बना l 
ताबूतों को भी दिलकशी में जीना सीखा आयी ये ll 

Wednesday, January 19, 2022

गुलदस्तां

गुलदस्तां हैं तू उन शबनमी गुलाबों का l
इश्क़ महके जिसके चुभते काँटों से भी ll

नाजुक कोमल पँखुड़ियों सा तेरा मासूम स्पर्श l 
छू रही मधुर चाँदनी जैसे कोई रसीला यौवन ll

महक रही पुरबाई बयार तेरी साँसों से ऐसे l
सुगंध तेरी मिल गयी इन धड़कनों से जैसे ll

कायनात तू इन रूमानी जज्बातों की l
जिस्म आफ़ताब रूहानी अंदाज़ों की ll

फरिश्ता तू उन मीठी चिलमन रातों की l 
डूबी रही सहर जिनके बंद गुलज़ारों की ll

सिमटी रहे सपनों सी इस निन्दियाँ गोद में l 
कैद करलूँ इन लम्हों को पलकों आगोश में ll 

Saturday, January 15, 2022

नया आयाम

अधरों पर अल्फाज़ मेरे थे पर ज़ज्बात तेरे थे l
अश्कों के दरिया में पर नयन दोनों के साथ थे ll

विरल थी तेरी वो अर्ध चाँद सी मासूम हँसी l
प्रेम ग्रहण लगा गयी जो इस नादाँ दिल को ll

महक रहा गुलाब सा यौवन गुल गुलशन सारा l
तेरे केशों साज में सजा जैसे वेणी गजरा सारा ll

ओढ़ ली जब आफताब ने चादर तेरे इश्क नाम की l
मुलाकातों के सायों में हमकदम भी एक साथ हो ll

मधुमास अंगार में जलती इसकी विरह चेतना l
रंग फूलों का गुलाब के इत्र सा महका रही जो ll

ख़ामोश सुर्ख लबों पर इश्क फ़साना लिख l
इबादत का नया आयाम दे गयी इस दिल को ll