Monday, February 1, 2010

कमी

कमी है मुझ में ऐसी कोई

प्यार कोई करता नहीं

नफरत के काबिल भी समझता नहीं

दोस्त कोई बने नहीं

दुश्मनों की कमी नहीं

प्रर्यत्न करू अच्छा करने की

पर होवे बिलकुल उसके उलट

इस कडवाहट से जिन्दगी बदली

आने लगी है ह़र बातों पे झंझलाहट

पर खुद में कमी की तलाश अब भी है जारी

रात ना गुजरे

चन्दा तू होले होले चल

रात इतनी जल्दी जाये ना गुजर

करले जी भर बातें प्रियतम संग हम

बस रखना तेरी चांदनी को थोडा काम

घूँघट जब सरकेगा निकलेगा मेरा भी चाँद तब

देख के उसको छिप ना जाना झट

चन्दा मेरे थोडा तो ठहर

जब तलक ना हो दीदार तब तलक तो ठहर

मिलन के इस पल का तू गवाह तो बन

चन्दा तू होले होले चल

ये रात इतनी जल्दी जाये ना गुजर

Saturday, January 30, 2010

पोल

बच्चों ने मचाया शोर

खुल गयी शेर की पोल

मुन्ना बन फिर रहा शेर का दोस्त

देख सामने बिल्ली रानी

शेर ने जोर से किलकारी मारी

डर लागे मुझे तुझसे बिल्ली रानी

मैं नहीं हु कोई शेर

रोब जमाने बच्चों पे

मैंने पहन ली शेर की खाल

अब कभी नहीं करूँगा ऐसी शैतानी

माफ़ कर दो मुझको ओ बिल्ली रानी

खुलते ही शेर की पोल

बच्चों ने मचाया शोर

मुन्ना हो गया शर्म से ढोल

दुर्भर

डर खौंफ भय आतंक

दुर्भर है जीना इनके बीच

जीना है तो सीखना है

इनसे मुकाबला करना है

उत्पन कोई कु विकार हो ना पाये

माहोल ना बदले ना जाये

परिस्थिथि बिगड़ ना पावे

रखना होगा मन मस्तिष्क को जोड़

वर्ना मुश्किल होगी खुशियों की खोज

ओर फिर जीना पड़ेगा

डर खौंफ भय आतंक के साये ही

Friday, January 29, 2010

अपना दर्द

दर्द आपने अपना बया किया

पर दर्द औरों का आप समझ ना पाये

स्वार्थी है आपकी फितरत

आप रोते हो बेमतलब

दर्द से ही है दर्द की पहचान

समझ लिया जो आपने दुनिया का दर्द

तो फिर दर्द की ना ही कोई बात है