Wednesday, March 27, 2013

रूप लावण्य

अधरों पे फिर वो ही गीत सजा रखना

शबनमी अधखुली पलकों से

मदहोशी का आलम छलका देना

जब हम आये तो

बाहों में भर सुला देना

भूल जाए कायनात सारी

आगोश में तेरी

प्यार की वो मधुर राग गुनगुना देना

ढल ना पाए ये पहर कभी

अपने रूप लावण्य बाँध इसे लेना

बाँध इसे लेना

खाब्ब कुछ इस तरह तुम सजा देना

अधरों पे फिर वो ही गीत सजा रखना

लगाव

रंगों से हुआ ऐसा लगाव

रंगों की चाहत ने दुनिया ही बदल डाली

रंगरेज हो अनुभूति सारी

रंगीन बना डाली तस्वीर पुरानी

रंगीन हो गयी उजली उजली हर शाम सुहानी

रंगों के रंग रंग गयी जैसे

कोई साज पुरानी

रंगों की रंगीनी में खो

रंगीन मिजाज हो गयी चक्षु बेचारी

रंग ही रंग दिखे अब हर तरफ

छिटक रही जैसे रंगों से चाँदनी

रंगों के इस रंग

रंगीन हो गयी तस्वीर पुरानी 

Sunday, March 24, 2013

प्रीत

गीत ऐसा मैं गुनगुनाऊ

तेरी साजो की तरन्नुम पे जिन्दगी लुटाऊ

तू गजल मेरी

मैं ताल बन गीत तेरे गुनगुनाऊ

गीत ऐसा मैं गुनगुनाऊ

प्रेम सुधा रंग बरसे

राग ऐसी छेड़ जाऊ

गीत ऐसा मैं गुनगुनाऊ

प्रीत तू मेरी

मीत तेरा मैं बन गीत तेरे गुनगुनाऊ

गीत ऐसा मैं गुनगुनाऊ

इस कशिश की चाँदनी

मधुर संगीत बन गीत तेरे मैं गुनगुनाऊ

गीत ऐसा मैं गुनगुनाऊ

तेरी साजो की तरन्नुम पे जिन्दगी लुटाऊ

गीत ऐसा मैं गुनगुनाऊ


 

मैं

मैं तो वो गागर हु

जो प्रेम सुधा छलकाता जाता हु

मीठे बोलों की एक एक बूंदों से

प्रेम सागर बहाता जाता हु

हर सुधा कंठ को

प्रेम अमृत रसपान कराते जाता हु

मैं तो वो गागर हु

जो प्रेम सुधा छलकाता जाता हु

Friday, March 22, 2013

नया जन्म

लूट लिया उन प्यार के बोलों ने

खोल दिया अंतर्मन के द्वारों को

कह उठी दिल की आवाज़ भी

चल जन्म फिर से लेते है

एक दूजे के होके जिते मरते है

गुजर जायेगी जिन्दगानी

नहीं तो ऐसे ही गुमनामी में कही

छोड़ इसलिए कसमे वादों को

चल वरण करे एक दूजे को

जन्म नया फिर से ले

तोड़ हर बंधन की माया को

तोड़ हर बंधन की माया को