Sunday, October 11, 2015

दीवार

ये गम तू कुछ इस तरह मुस्करा

बबंडर

ग़मों की आँधियों के

मंजिल अपनी भटक जाए

और खिलखिलाती धूप भी

सौगात में

आँसुओ की ताबीर लिए चली आए

माना मुश्किल बड़ा ही यह इम्तिहान

पर छोड़ दिया जो कफ़न एक बार

बिन जनाजे ही

दफ़न हो जायेंगे सारे गम गुब्बार

ले आयेगा सकून

आँसुओं की फुहार

और बहा ले जायेगा संग अपने

हर रंजो गम की दीवार

Tuesday, September 22, 2015

ख़ौफ़

मैं पानी पे नाम उसका लिखता रहा

वो रेत के महल बनाती रहीं

सपनों की इस डोर को

लहरों का ख़ौफ़ ना था

रिश्तों की इस माला को

बिखरते घरोंदों का रंज ना था

थी बस एक ही लगन

चाहे उजड़ते रहे आशियाँ

मिटते रहे नामोनिशां

मगर सपनें आँखों में

यूँ ही बस पलते रहे

ओर सपनें बस यूँ ही पलते रहे




Sunday, September 20, 2015

अधूरा मिलन

तराशा था जिसे खाब्बों में

तलाशता फिरा उसे फिर ज़माने में

पर मिला ना कोई ऐसा अब तलक इस जमाने में

रंग भर दे जो उस मूर्त में

तराशी थी जिसकी सूरत खाब्बों में

यूँ तो सितारें अनेक मिले राहों में

पर चाँद वो नजर ना आया

तराशा था जिसे खाब्बों में

माना हुस्न की कमी ना थी ज़माने में

मगर वो ना मिली

तस्वीर जिसकी बसी थी आँखों में

गुनाह यह दिल का था या आँखों का

गुमान इसका ना था

पर चाहत का यह कैसा अहसास था

अरमानों से तराशा था जिसे

रंग उसके

आज भी तलाशता फिर रहा हूँ राहों में

आज भी तलाशता फिर रहा हूँ राहों में
  














Tuesday, September 8, 2015

दर्द से नाता

दर्द से मेरा गहरा नाता हैं

वफ़ा कोई इससे सीखे

हर बातों में जीसने

हँसी को रुलाया हैं

दर्द से मेरा गहरा नाता हैं

साये ने इसके

ऐसा मुझको घेरा हैं

अँगार जो दिल में हैं

तूफ़ान जो जज्बातों में हैं

सात जन्मों का

नाता जैसे उनसे जोड़ा हैं

हर कदम जैसे

मोहब्बत बन गयी यह मेरी

ऐसा दर्द से मेरा गहरा नाता हैं

पराया दिल

मुझे ए मालूम था

दिल अपना पराया था

फिर भी इश्क़ इससे लगाया था

खबर ना  हो किसीको

साँसों को इसलिए

हमराज बनाया था

धड़कनें जो तब गुनगुनाती थी

खाब्ब हसीन उनकों भी दिखलाया था 

मुझे ए मालूम था

दिल अपना पराया था

फ़िर भी खुद को ए समझाया था

जीना बिन इसके गँवारा ना था

रिश्ता मोहब्बत का

इससे कुछ ऐसा बनाया था

जब मुझे ए मालूम था

दिल अपना पराया था

फिर भी इश्क़ इससे लगाया था