Sunday, April 3, 2016

हारी बाजी

कहानी मेरी भी औरों से जुदा ना थी

शतरंज की बिसात पे जैसे जिंदगी सजी थी

एक अदना सा मोहरा था मैं उस चाल का

लगाम जिसकी थी दिग्गजों के हाथ में 

पर वर्चस्व के इस समर में

कुरुक्षेत्र की रणनीति अभी आनी थी

मगर चूक गयी गर्दन तलवार की धार से

ओर पलट दी बाजी मोहरे ने धीमी चाल से

मात खा गया बादशाह एक सिपहसालार से

छोड़ जीत के जश्न को मध्य मार्ग में

मोहरे ने फिर बैठा दिया बादशाह को तख्तों ताज पे

ओर राज हो गया मोहरे का सबके दिलों दिमाग पे

पर राजनीति के इस द्वन्द में

फिर भी मैं हार गया अपनों के हाथों जीत के

अपनों के हाथों जीत के

Monday, March 21, 2016

मर्ज़

हवा न जाने कौन सी छू गयी

मर्ज़ इश्क़ का हमको दे गयी

खिलते गुलाब सा मुखड़ा

जैसे सौगात में दे गयी

जालिम बदल फ़िर फिजाँ की बयार

रुख से नक़ाब उड़ा ले गयी

ओर जाते जाते , दिल के चमन में

जन्नत बसा गयी

ना आया जिसे कभी इश्क़ करना

उसे इश्क़ की वादियों में तन्हा छोड़ गयी

हवा न जाने कौन सी छू गयी

मर्ज़ इश्क़ का हमको दे गयी

हवा न जाने कौन सी छू गयी

Thursday, March 3, 2016

लफ्ज़

अधरों को मेरे लफ्ज़ अगर मिल जाते

करने हर खाब्ब को सच

पर लगा के वो उड़ जाते

ठहर ना पाती बात इसी तलक

क्योंकि, सितारों की महफ़िल से निकल वो

करीब चाँद के चले आते

आरजू जो थी दिल की

हसरतें वयां करने की

तम्मना पूरी वो कर पाते

तुम मानो  या ना मानो

रुखसत तेरे दिल से फिर कैसे हो पाते

अधरों को मेरे जो लफ्ज़ मिल जाते

अधरों को मेरे जो लफ्ज़ मिल जाते

Wednesday, March 2, 2016

कोहराम

बड़ी मनहूस थी वो रात

छूट गया जब तेरा मेरा साथ

बदलते हालातों की थी ए आग

भस्म हो गयी जिसमें रिश्तों की बुनियाद

गुम हो गयी वो थी प्यार की पुकार

रह गयी थी सिर्फ सिसकियों की आवाज़

बसने से पहले उजड़ गयी आशियाने की दीवार

रह गया खंडहर याद दिलाने उस रात का कोहराम 


Sunday, February 14, 2016

जीना

तू गुज़रे कल की बात ना कर

आने वाले कल की बात कर

सँवर जाएगा मुकद्दर

वक़्त को हमसफ़र बना के चल

तस्वीर फ़िर रंग जायेगी

महफ़िल क़ामयाबी की जब सज जायेगी

माना जो गुज़र गया वो अपना ना था

पर आनेवाला जो सपना था

वही एक पल तो अपना था

क़वायद इसलिए जिंदगी की तू सीख ले

कल के बदले आज में जीना सीख ले