Sunday, February 7, 2010

उत्पीड़न

नारी शौषण को देख

विचार मन में कोंधा

निष्ठुर क्यो है इतना मानव

प्रतिशोध है कैसा उसके मन समाया

जन्म दिया जिसने उसे ही बेरी क्यों बनाया

कलंकित कर दिया इस धारा ने

सारी मानव जात को

दुर्भाग्य आज तलक नारी उत्पीड़न के खिलाफ

आवाज ना कोई बुलंद कर पाया

कब होगा अंत इस पीड़ा का

कोई कह पाया नहीं


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