Tuesday, November 1, 2022

मौन

मौन ही वह सबसे सुंदर अहसास था l

पल जो उसके लबों से होकर गुजरा था ll


उफनता सागर भी वो ठहर गया था l

खुशबु को इसकी जब मैंने छुआ था ll


स्पर्श हृदय मन ने किया था जिस मौन को l

अल्फाज़ आहटें बिखर गयी थी उस पल को ll


मौन वाणी पल्लवित सुगंध महका अंबर को l

आतुर कर गयी थीं छुने उन उड़ते परिंदों को l


समेटा इन मौन अक्षरों को सदियों बाद फिर l

प्रेम कपोल प्रस्फुटित हो गया एक बार फिर ll


धूप छाँव सी दस्तक देती  किंवदंतियों इन मौनौ की l

शब्द सार नक्काशी तराशती फिर उन्हीं अहसासों की ll


अधूरी रह गयी थी चेतना जिन अल्फाजों की l

मौन उसकी लिख गयी नयी इबादत जज़्बातों की ll


मौन उसकी लिख गयी नयी इबादत जज़्बातों की ll

मौन उसकी लिख गयी नयी इबादत जज़्बातों की ll

13 comments:

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    1. आदरणीय सुशील भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  2. मौन को परिभाषित करती सुन्दर रचना।

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    1. आदरणीया मीना दीदी जी
      ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

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    1. आदरणीय शांतनु भाई साब
      सुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद

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  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज शुक्रवार(०४-११-२०२२ ) को 'चोटियों पर बर्फ की चादर'(चर्चा अंक -४६०२) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. आदरणीया अनीता दीदी जी
      मेरी रचना को अपना मंच प्रदान करने के लिए तहे दिल से आपका आभार

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  5. मौन पर गहन सृजन।
    सुंदर रचना।

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    1. आदरणीया कुसुम दीदी जी
      ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

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  6. कभी कभी जुबां वो नहीं कह पाती, जो बात मौन कह जाती है!!
    बस वैसे ही आपकी लेखनी ने बहुत कुछ कह डाला👌👌

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    1. आदरणीया रूपा दीदी जी
      ह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं

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  7. सुगंधित मौन... सुन्दर भावाभिव्यक्ति।

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