अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l
कहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ ll
ललाट पर बिंदी की वो मोहर गालों की रुखसार बताया करता हूँ l
बालियों की धड़कनों से उसकी लहराती केश लट्टे उलझाया करता हूँ ll
नमी उसके आँखों की अपने काजल से पलकों बंद कर लेता हूँ l
डोरी उसके दिल पतंगों की दूसरी मांझे पेंचो से बचाया करता हूँ ll
तारूफ सुन उस चाँद की पता पूछने लगा आसमाँ चाँद भी l
कहा ठहर कोरी कल्पना नहीं घूंघट हटा दिख जायेगा पास अभी Il
तूने इत्र सा महकाया आँचल छोर बना राधा प्रेयसी रूप जिसका l
ये चाँदनी सहेली पता ना पूछ उस पागल चितचोर दिल तरन्नुम का ll
बहुत ख़ूब मनोज जी!
ReplyDeleteआदरणीय जितेन्द्र भाई साब
Deleteसुंदर शब्दों से हौशला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से धन्यवाद
अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l
ReplyDeleteकहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ बहुत सुंदर तस्वीर चाँदनी रात की की रचना में घुल गई एक ख़ुशबू बन कर
आदरणीया मधुलिका दीदी जी
Deleteह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं
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ReplyDeleteदीवाने की बातें अजब थी ,
ReplyDeleteतनहाई जो में जो गुजरी
वो रातें अजब थी!
खुशबू जिनकी ना मिटाये से मिल सकी
जो फिर ना हो सकी मुलाकातें गजब थी!!
मुहब्बत के हसीन पलों की दिलकश तस्वीर प्रस्तुत करती रचना के लिए बधाई प्रिय मनोज जी!
आदरणीया रेणु दीदी जी
Deleteह्रदय तल से आपका आभार, आपका प्रोत्साहन ही सही मायने में मेरी लेखनी का ऊर्जा स्त्रोत हैं
आपकी लेखनी यशस्वी हो प्रिय मनोज जी!
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