Monday, November 1, 2010

मिलन की आस

सितम तेरे सारे सहते रहे

तेरी सलामती की दुआ फिर भी माँगते रहे

अश्को ने भी छोड़ दिया साथ

पर गुजरे लहमे याद कर मुस्कराते रहे

खत्म हो गयी जिंदगानी जलते जलते

पर साँसे बची है अब तलक

तेरे मिलन की आस लिए

तू ही तू

तुम इस दिल की कविता बन गयी

रग रग में यूँ समां गयी

जुबा जब भी खुली

ह़र लफ्ज में तू ही तू नज़र आयी

इस कदर तेरी दीवानगी छाई

ह़र फूल में तू ही तू नज़र आयी

जन्म जन्म

तेरी याद में

साँसे अगर छोड़ दे साथ

गुजारिश है हमारी छोटी सी फ़रियाद

कब्र पे हमारी जब भी आना

फूल जरुर साथ लाना

इंतकाल का बाद

कब्र अपनी हमारे पास बनवाना

वादा जन्म जन्म साथ निभाने का

मौत के बाद भी निभा जाना

कहानी

ह़र शबनम की अपनी जिंदगानी है

कलि से फूल बनने की कहानी है

छोटी ही सही

अफ्सानो से भरी ह़र जवानी है

प्यार

आ तुझे इतना प्यार में करू

साँसे अपनी तेरे नाम करू

दरमियाँ रहे ना कोई फासले

बाहों में तुझको छुपालू

आँखों में कैद कर

दिल में तुझे बसा लू

आ तुझे इतना प्यार में करू