Tuesday, August 22, 2017

राहें

राहें कुछ ऐसे गुम हो गयी

तन्हा चलते चलते मंजिल भटक गयी

पगडंडी भी कांटो का झाड़ बन गयी

अजनबी सी मानो पहचान बन गयी

चौराहों में चौराहों की जैसे राह सज गयी

कदम जिस ओर चले

तक़दीर वो राह भटक गयी

राहों की भूलभुलैया ने कायनात बदल दी

आती जाती मुड़ती राहों ने

सपनों के सौदागर की राह बदल दी

तन्हाइयों के आलम में

राहें कुछ ऐसे गुम हो गयी

ज़िंदगी खुद से अंजान हो गयी

Sunday, August 20, 2017

आनंद

उलझें रहे हम तुम सवालों में

रंगीन आसमानी नज़रों में

कभी चाँद कभी सितारें

ढूँढ रहे अपने जबाबों में

सुध बुध बस कुछ नहीं

तल्लीन वक़्त के ख्यालों में

हर हल में भी पेंच नज़र आ रहे

जैसे उलझ गए

अनसुलझे सवालों में

आनंद इसका भी अपना हैं

ब्रह्माण्ड के इन सुन्दर नज़रों में

विचलित नहीं होता मन

उलझें उलझें जबाबों से

इन पहेली बुझती राहों में

हमसफ़र बन गए हम तुम

खो रंगीन आसमानी नज़रों में

खो रंगीन आसमानी नज़रों में 

Saturday, August 19, 2017

महफ़ूज

वो अक्सर ख्यालों में ही महफ़ूज रहे

सामने जब जब आए

नजरें चुरा के चले गए

अदा उनकी यह

मन को ऐसी भा गयी

मीठा सा दर्द बन दिल में समा गयी

अल्हड़ कमसीन नादाँ उम्र कुछ समझ ना पायी

ओर इश्क़ के मर्ज से खुद को महफ़ूज रख ना पायी

स्वाभिमानी

माना ज्ञानी नहीं अज्ञानी हूँ मैं

फ़िर भी गुरुर से सराबोर रहता हूँ मैं

तिलक हूँ किसीके माथे का

महक से इसकी नाशामंद रहता हूँ मैं

नाज़ हैं ख़ुद पे बस इतना सा

अभिमानी नहीं स्वाभिमानी हूँ मैं

अपनों से फिक्रमंद नहीं रजामंद हूँ मैं

दिल की दौलत से ऐसा सजा हूँ मैं

फ़कीरी में भी अमीरी से लबरेज़ रहता हूँ मैं

ना ही मैं कोई संत हूँ ना ही कोई साधू हूँ

फ़िर भी एक सच्चा साथी हूँ मैं

क्योंकि

अभिमानी नहीं स्वाभिमानी हूँ मैं 


बेआवाज़

रातें ए बेआवाज़ नहीं

दरियाँ की क्या कोई पहचान नहीं

माना

धड़कनों के संगीत में

शोरगुल की कोई फ़रियाद नहीं

पर रातें ए भी बेआवाज़ नहीं

बड़ी मुश्किलों से कटता हैं यह सफ़र

क्योकिं बिन शोरगुल

इस जीवन की कोई पहचान नहीं

यतार्थ में सन्नाटे की चीत्कार

दिल के दरम्यां गुम होने की

कोई मिशाल नहीं

रातें ए बेआवाज़ नहीं