Tuesday, August 8, 2023
ll बारिश की तान ll
Thursday, August 3, 2023
सगर
गुजारी थी कई रातें ख्वाबों के सिरहाने तले l
सितारों की आगोश में चाँदनी लिहाफ तले ll
फिर भी तवायफ सी थी ख्वाहिशें धड़कनों की l
राहों टूटे घुँघरू पिरो ना पायी माला साँसों की ll
बंदिशें कौन सी क्यों थी चाँद की पर्दानशी में l
बेपर्दा कर ना पायी जो पलकों तले राज छुपे ll
दूरियों के अह्सास में भी जैसे कोई आहट साथ थी l
फुसफुसा रही हवा झोंकों में कुछ तो खास खनकार थी ll
मिली थी जो कल फिर उस पुराने बरगद छाँव तले l
परछाई की उस रूमानी रूह में रूहानी साँझ थी ll
आकार निराकार था उस प्रतिबिंब के दर्पण नजर में l
फिर भी हर अल्फाजों में उसकी ही बात सगर रही थी ll
Friday, July 7, 2023
शिकवा
अदना सा ख्याल यूँ ही जाने क्यों मन को भा गया l
गुफ़्तगू इश्क की खुद से भी कर लिया करूँ कभी ll
गुजरु जब फिर यादों की उन तंग गलियों से कभी l
जी लूँ हर वो लम्हा उम्र जहां आ ठहरी थी कभी ll
हँसूँ खुल कर मिल कर खुद से इसके बाद जब कभी l
झुर्रियों चेहरे की सफ़ेदी बालों की इतराने लगे खुशी ll
अन्तर फर्क़ करूँ उन लिफाफों में कैसे फिर कभी l
सूखे गुलाब आज भी जब महक रहे ताजे से वहीं ll
संवारू निहारूं जब जब दर्पण फुर्सत लम्हों में कभी l
परछाईं झलक इश्क की भी शिकवा और ना करे कभी ll
Wednesday, June 14, 2023
छेड़खानियाँ
Monday, May 1, 2023
आलाप
सुन सावन के पतझड़ की रागिनी आलाप l
ख़त लिख भेजे बारिश की बूँदों ने दिल के साथ ll
उलझे उलझे केशे भीगे भीगे आँचल की करताल l
मानों दो अलग अलग राहें ढ़लने एक साँचे तैयार ll
ग़ज़ल जुगलबंदी के साज झांझर भी थिरके नाच l
अर्ध चाँद और भी निखर आया सुन बारिश की ताल ll
ताबीज बनी थी जो आयतें उस शरद पूनम की रात l
कर अधर अंश मौन महका गयी अश्वगंधा बयार ll
शरारतों की बगावत थी वो रूमानी साँझ l
शहनाई धुन घुल गयी चूडियों की बारात ll
काश थम जाती वो करवटें बदलती साँस l
मिल जाती दो लहरें एक संगम तट समाय ll
रूह से रूह का था यह रूहानी अहसास l
मौसीक़ी से जुदा ना था बारिश का अंदाज ll
सुन सावन के पतझड़ की रागिनी आलाप l
ख़त लिख भेजे बारिश की बूँदों ने दिल के साथ ll