दूरियाँ थी मेरे रहनुमा राहों ख्यालातों किनारों में l
गौण मौन खड़े थे इस पथ सारे जज्बात मुहानों पे ll
डूब गयी थी कमसिन काया अलबेली मोज धाराओं में l
निकाह कामिनी बाँधी जिसे मन्नत पाक दिशा धागों ने ll
रुखसत अश्रु व्यथित रो ठहरे हुए नयनों परिभाषा में l
खोये पैगाम अंजुमन सागर बह चले जल तरंगों पे ll
गुलदस्ता मेहर मुरझा गया स्वप्निल अंकुरण से पहले l
अंतर्बोध ताज मीनारे ढहा बहा गया सूखे सैलाब तले ll
सौदा गुलमोहर किरदारों का टाँक गया पैबंद इसका l
फूल किताबों के बदरंग हो गए इन सलवटों के पीछे ll