Saturday, October 31, 2009

भुलाना

भुलाना तुझे बहुत चाहा

पर भुला ना पाये

बीते लहमो को भूल ना पाये

कोशिश की मगर

यादो के झरोके को बंद ना कर पाये

ख़ुद को तुझ से जुदा ना कर पाये

अहसास तेरा भुला भुला ना पाये

कहने को नफरत भी की

फिर भी तुझको भुला ना पाये

चाहा तो बहुत तुम को भूल जाए

पर चाह कर भी भूल ना पाये

लड़ना झगड़ना

जुदा जुदा एक दूजे से खफा खफा

माने ना सुने ना

रूठा रूठी छोडे ना

एक दूजे बिन रह पावे ना

लुक्का छिपी छोडे ना

हर बातों पे तकरार छोडे ना

साथ एक दूजे का कभी छोडे ना

प्यार से इनकार करे ना

पर लड़ना झगड़ना छोडे ना

प्रेम अनुभूति

क्यो होती है प्रीत क्यो होता है प्यार

जो ना होती प्रीत ना होता प्यार

ना होते श्याम ना होती राधे

इनकी जुगल छबि से ही है प्रेम रस की दुनिया

दिल से दिल को जोड़ना ही है प्रेम की रचना

क्यो प्यार में होता है दर्द क्यो होते है आंसू

दर्द प्यार बडाता है आंसू गम भुलाते है

जो ना होते आंसू तो ना होता दर्द

ना पीती मीरा जहर

ना समझती पाती दुनिया प्रेम अनुराग

क्यो होती प्यार में कसीस क्यो होता है जादू

जो ना होती कसीस ना होता जादू

तो ना होती चाहत

ना होती राधा ना होती मीरा

ना बहती प्रेम की अमृत धारा

जो ना होती प्रीत ना होता प्यार

जो ना होता दर्द ना होते आंसू

जो ना होती कसीस ना होता जादू

तो फिर खुदा क्यो दिल ये बनाता

दिल की धड़कन ही है प्रेम अनुभूति

सारी दुनिया है इस ढाई आखर में ही सिमटी

Friday, October 30, 2009

नसीहत

हम दुश्मनों में भी दोस्त तलासते रहे

अपने हाथो अपना दामन जलाते रहे

एक अजनबी ने कहा

क्यो अपने ऊपर सितम डाहते हो

गैरों के पीछे क्यो अपनी जिंदगानी लुटाते हो

वक्त रहते संभल जाओ

लोट के अपनों के पास आजाओ

शिकार

तरकश के तीर खत्म होने आए

शिकार एक हाथ ना लगा

वन वन भटका

निशाना एक ना लगा

धनुष की टंकार

हाथियों की हुंकार

नगाडो की आवाज़

शिकार एक ना निकाल पाए

आवाज़ को लक्ष्य कर जो तीर चलाया

वो निशाने पे जा लगा

शिकार के सीने को बेंध प्राण हर गया