Friday, July 7, 2023

शिकवा

अदना सा ख्याल यूँ ही जाने क्यों मन को भा गया l

गुफ़्तगू इश्क की खुद से भी कर लिया करूँ कभी ll


गुजरु जब फिर यादों की उन तंग गलियों से कभी l

जी लूँ हर वो लम्हा उम्र जहां आ ठहरी थी कभी ll


हँसूँ खुल कर मिल कर खुद से इसके बाद जब कभी l

झुर्रियों चेहरे की सफ़ेदी बालों की इतराने लगे खुशी ll


अन्तर फर्क़ करूँ उन लिफाफों में कैसे फिर कभी l

सूखे गुलाब आज भी जब महक रहे ताजे से वहीं ll


संवारू निहारूं जब जब दर्पण फुर्सत लम्हों में कभी l

परछाईं झलक इश्क की भी शिकवा और ना करे कभी ll

Wednesday, June 14, 2023

छेड़खानियाँ

जिस धूप की छाँव बन जो सजी सँवरी फिरती थी कभी l

छेड़खानियाँ उसकी अक्सर अश्कों की बारात सी थी सजी ll


जुल्फें अक्सर उसकी उलझी रहती थी सवालों से अटिपटी सी l

फिर भी बेतरतीब लट्टों से यारी थी अँगुलियों रंगदारियाँ नयी सी ll


प्रतिबिंब हज़ारों थे मन दर्पण टूट बिखरे हुए हिस्सों में l

फिर भी उसके अक्स का नूर था इसके हर हिस्सों में ll


तहरीर तालीम जिस दहलीज को दस्तक दे रही थी जो अब l

रुखसत थी छाया इसकी अब अंजुमन मुकाम के इस सफर ll


रंग शायद उसकी जुल्फों का ढ़ल चाँदनी सा निखर गया होगा अब l

शायद तभी मेरी सहर से साँझ का वक़्त भी मुकर्रर हो चला था अब ll


मेहंदी सी गहरी सुरमई छाप सजी थी जिस नफ़ासत धूप की l

कनखियाँ हौले से टोह लेती नफ़ीसी उन छेड़खानियाँ रूह की ll


आलम खुमारी उन खतों में पड़ती झुर्रियों का ही था l

सलवटें भरे उन सादे पन्नों में नाम उसका ही मयस्सर था ll

Monday, May 1, 2023

आलाप

सुन सावन के पतझड़ की रागिनी आलाप l

ख़त लिख भेजे बारिश की बूँदों ने दिल के साथ ll


उलझे उलझे केशे भीगे भीगे आँचल की करताल l

मानों दो अलग अलग राहें ढ़लने एक साँचे तैयार ll


ग़ज़ल जुगलबंदी के साज झांझर भी थिरके नाच l

अर्ध चाँद और भी निखर आया सुन बारिश की ताल ll


ताबीज बनी थी जो आयतें उस शरद पूनम की रात l

कर अधर अंश मौन महका गयी अश्वगंधा बयार ll


शरारतों की बगावत थी वो रूमानी साँझ l

शहनाई धुन घुल गयी चूडियों की बारात ll


काश थम जाती वो करवटें बदलती साँस l

मिल जाती दो लहरें एक संगम तट समाय ll


रूह से रूह का था यह रूहानी अहसास l

मौसीक़ी से जुदा ना था बारिश का अंदाज ll


सुन सावन के पतझड़ की रागिनी आलाप l

ख़त लिख भेजे बारिश की बूँदों ने दिल के साथ ll

Sunday, April 2, 2023

चेतना

उन्मुक्त परवाज भरता अभिव्यक्ति सार्गर्भित विचार  l 

अवहेलना व्याख्यान अविरल तुष्टीकरण करते निदान ll


निंदक निंदा भागीदार खोले ऐसे अद्भुत द्वार l

द्रुतगति सींचे नीव नवनिर्माण के साँचे द्वार ll


बबूल झाड़ियां मरुधरा नतमस्तक नील आकाश l

व्यथित पीड़ा खोज लायी मृगतृष्णा नव अवतार ll


मेरुदंड हिमशिखर बाज सी पैनी चाणक्य धुरंधर बात l

शत्रु सहभागी सूत्र पिरो दिया दशों दिशा नया आयाम ll


छोर क्षितिज संरचना गणना आदित्य के वरदान l

भूमिका महत्ता रोशनी संस्कृति विवेचन विचार ll


अध्याय आधार गतिशील प्रतिपल शिक्षा के संस्कार l

विश्वस्वरुप आधिपत्य संजो रहा एक नया इतिहास ll


सागर सरहदें मंथन निरंतर चेतन निर्माण चिंतन l

ध्वजा शंखनाद उद्घोष धरा उत्तम संगम तर्पण ll


पृष्ठभूमि रचित सृजन भूमिका अभिलाषा ज्ञान दान l

प्रस्फुटित अंकुर गुलाब महका रहा ब्रह्मांड दर्श ज्ञान ll

Monday, March 6, 2023

फागुन की थाप

रंगों की प्रीत ने घोली हीना सी ऐसी मदमाती सुगंध चाल में l

केशों में गुँथी वेणी भी थिरक उठी इसके ही रंगों साज में ll


चंद्र शून्य भी भींग इसकी  बैजन्ती के कर्ण ताल में l

लहरा रही कुदरत प्यासे मरुधर मृगतृष्णा ताल में ll


इन्द्रधनुषी रंग बिखराती लाली बिंदी माथे सजी l

बाँसुरी सी बजा रही समंदर ख्यालों अरमान में ll


खनखन करती चूडिय़ां सम्भाल रही ओढ़नी डोर साथ में l

राग सरगम बरस रही इनके रंगें इशारों छुपी जो साथ में ll


चढी खुमारी रंगों की ऐसी फागुन के फाग में l

चाँद भी रंग आया डफली की मीठी थाप में ll


मुरीद अधर रंग सहेजे जिस कोकिल कंठी राग के l

रंग गयी चुपके से वो मुझे अपने ही रंगों रुखसार में ll


गुलाल गुलाब के बिखरते रंगों होली जज्बात में l

सांवला रंग भी निखर आया साँसों के रंगों रास में ll