Monday, October 2, 2023
उन्माद
Friday, September 8, 2023
प्रफुल्लित निंद्रा
तपती रेगिस्तानी रेत में छाले उभरे नंगे पांव में l
निपजी थी एक जीवट विभाषा इसके साथ में ll
बुलंद कर हौसलों को बढ़ता चल यामिनी राह पे l
विध्वंशी लू थपेड़े पराजित से नतमस्तक साथ में ll
मृगतृष्णा प्यासी इस धरोहर पिपासा रूंदन नाद में l
सुर्ख लहू भी जम गया बबूल की सहमी काली रात में ll
खंजर चुभोती तम काली घनी कोहरी डरावनी छांव में l
रुआँसा उदास अकेला रूह अर्ध चाँद परछाई साथ में ll
कुंठित मन व्याकुल अभिलाषा अधीर असहज वैतरणी नाच में l
धैर्य धर अधरों नाच रही फिर भी निंद्रा प्रफुल्लित अपने साथ में ll
Sunday, September 3, 2023
सगर
Tuesday, August 8, 2023
ll बारिश की तान ll
Thursday, August 3, 2023
सगर
गुजारी थी कई रातें ख्वाबों के सिरहाने तले l
सितारों की आगोश में चाँदनी लिहाफ तले ll
फिर भी तवायफ सी थी ख्वाहिशें धड़कनों की l
राहों टूटे घुँघरू पिरो ना पायी माला साँसों की ll
बंदिशें कौन सी क्यों थी चाँद की पर्दानशी में l
बेपर्दा कर ना पायी जो पलकों तले राज छुपे ll
दूरियों के अह्सास में भी जैसे कोई आहट साथ थी l
फुसफुसा रही हवा झोंकों में कुछ तो खास खनकार थी ll
मिली थी जो कल फिर उस पुराने बरगद छाँव तले l
परछाई की उस रूमानी रूह में रूहानी साँझ थी ll
आकार निराकार था उस प्रतिबिंब के दर्पण नजर में l
फिर भी हर अल्फाजों में उसकी ही बात सगर रही थी ll