Saturday, July 18, 2009

जीवन

जीवन एक अजबूझ पहेली

कभी धुप तो कभी छाँव

मौसम बदले रंग हजार

मानव मन बदले बार बार

अपनापन एक सपना है

जो सबसे बड़ा धोखा है

मन अशांत दिमाग अस्थिर

क्रोध की लावा आँखों में

जीवन सत्य यही

नेकी कर दरिया में डाल

जीना है खुशी से

ना किसी से नाता जोड़

ना गैरों को अपना

यह कठिन वचन सदैव अपना

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