Friday, August 17, 2018

अधूरे अल्फ़ाज़

कुछ अल्फ़ाज़ अधूरे से हैं

कुछ गीत अधूरे से हैं

वो अगर मिल जाये तो भी

कुछ खाब्ब अधूरे से हैं

खुली किताबों सी हैं ए कहानी

दीवारों पे उकेरी हो

जैसे कोई अधूरी सी चित्रकारी

अब तलक अधूरी हैं वो जिंदगानी

देखि थी जिसने कभी

निगाहों की मेहरबानी

कुछ रस्म कुछ रिवाज

चुरा ले गए थे दिल के आफ़ताब

बिछड़ गयी थी चाँदनी

अधूरे रह गए थे अरमान

जैसे ही ली रंगों ने करवट

बदल गए थे सारे अंदाज़

इस बेखुदी में ख़ामोशी से

बस हम तकते रह गए आसमान 

7 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-08-2018) को "सिमट गया संसार" (चर्चा अंक-3068) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुंदर कविता

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  3. बिछड़ गयी थी चाँदनी

    अधूरे रह गए थे अरमान

    बहुत खूब

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  4. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 21/08/2018
    को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  5. बिछड़ गयी थी चाँदनी

    अधूरे रह गए थे अरमान

    जैसे ही ली रंगों ने करवट

    बदल गए थे सारे अंदाज़

    इस बेखुदी में ख़ामोशी से

    बस हम तकते रह गए आसमान
    .
    क्या बात... सुंदर रचना

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  6. बहुत कुछ अधूरा सा है ... जो असहज कर जाता है ।।.

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