Tuesday, August 4, 2009

उदीयमान भविष्य

सुबह की लालिमा अंधकार के सारे बंधन तोड़

रोशनी की नई किरण फेला रही है

गुनगुनी धुप मन को लुभा रही है

पपीहे के शोर से मन आनंदित हो रहा है

जीवन एक नई आशा का संचार हो रहा है

उगते सूर्य को देख

उदीयमान भविष्य का सपना साकार हो रहा है

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