Thursday, May 27, 2010

जीवन का मोड़

सूर्य अस्त हो चला

सांझ घिर आयी

खड़े थे जिसके इन्तजार में

वो बेला ना आयी

खुदगर्ज हो गया

भूल गया एक पल में सबको

नाता तोड़

अँधेरे में निकल पड़ा

करने खुद की खोज

अस्त हो गया जीवन का मोड़

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