Sunday, November 29, 2009

आखरी ख़त

सज गई डोली आ गये बाराती

अब तो पढ़ लो मेरा आखरी ख़त

फेरे पड़ जाय किसी ओर संग

उससे पहले भरले मांग मेरे नाम की

बिदा हो गई जो किसी ओर के साथ

जीवन भर पछताओगी अजनबी को गले लगा

पढ़ ले तू ये ख़त आखरी

पगली कब समझ आयेगी ये दीवानगी

डाल के वरमाला मेरे गले

चल पड़ तू मेरे साथ ही

थामने तेरा हाथ

खड़ा हु तेरे पास ही

बस एक बार पढ़ ले तू ख़त आखरी

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