Sunday, October 25, 2009

नजराना

एक ताजमहल मैं भी बनवाऊ

प्यार की इबादत उसमे खुद्वाऊ

मोह्बत की ये निशानी

नजराने में तुझे भेंट करू

महकता रहे अपना प्यार

खिलते रहे प्यार के गुलाब

दुआ रब से ये ही करू

मरके भी जो है साथ निभाना

तेरी कब्र के बगल में मेरी कब्र बनवाऊ

एक ताजमहल में भी बनवाऊ

No comments:

Post a Comment