Friday, January 22, 2010

खिलता गुलाब

खिलते गुलाब की तुम कलि हो

काँटो में रह कर भी अनछुई सी हो

रंगों में रंगे तेरे लबों पे

दिल कह रहा बस मेरा ही नाम हो

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