Sunday, January 17, 2010

पंख

तम्मना बस इतनी सी है

ख्वाईस छोटी सी है

काश दो पंख हम को भी मिल जाते

उड़ के तेरे पास चले आते

तुम पलके झुकाती

इससे पहले तेरे नयनों

से काजल चुरा ले जाते

तेरी पलके बंद होते ही

हम फुर्र से उड़ जाते

तुम कुछ समझ पाते

इससे पहले हम तेरे दिल में

अपना आशिया बना आते

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