Saturday, January 9, 2010

अंधविश्वास

बने साधू संत अनेक

रचे गए ग्रन्थ अनेक

पर समझा ना सके

इनका मर्मरग्य कोई एक

खो गई वो ओजस्व वाणी

भूल गए गीता उपदेश

फ़ैल गए पाखंड के दानव

नजर आ रहे है सिर्फ़ आडम्बर ही आडम्बर

बाँट रहे है अंधविश्वास और वहम के प्रसाद

पढ़ा रहे है ज्ञान की जगह अज्ञान के पाठ

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